कुतुबुद्दीन ऐबक का इतिहास और गुलाम वंश: यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं में निश्चित अंक प्राप्त करने एवं आत्मविश्वास बढ़ाने का एक अत्यंत सुलभ माध्यम है। ऐबक का प्रत्येक तथ्य, स्मारक और ऐतिहासिक निर्णय आपको सफलता की ओर ले जाएगा। आज का यह संक्षिप्त अध्ययन परीक्षा में आपको निर्णायक बढ़त दिलाएगा।
गुलाम वंश (मामलूक वंश) दिल्ली सल्तनत का पहला राजवंश था। इसकी स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक (1206–1210 ई.) ने की थी, जो मूल रूप से सिपहसालार मुइज़ुद्दीन मुहम्मद गोरी का निष्ठावान सहयोगी एवं प्रतिनिधि था।
ऐबक ने अपने अल्पकालीन शासन में न केवल तुर्की राज्य की नींव को सुदृढ़ किया, बल्कि भारत में इंडो-इस्लामिक स्थापत्य कला की शुरुआत भी की। उसने दिल्ली में ‘कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद’ तथा ‘कुतुब मीनार’ और अजमेर में ‘अढ़ाई दिन का झोंपड़ा’ जैसी ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण प्रारंभ करवाया। ऐबक का शासनकाल नव-विजित क्षेत्रों के संगठन, आन्तरिक कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा कला एवं विद्वानों को संरक्षण देने के लिए जाना जाता है।
ये संक्षिप्त नोट्स उनके जीवन, प्रशासनिक उपलब्धियों और स्थापत्य योगदान का प्रामाणिक सार प्रस्तुत करते हैं, जो UGC-NET, PGT, TGT, GIC, Assistant Professor, IAS एवं PCS जैसी उच्च स्तरीय परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं।

गुलाम वंश (Slave Dynasty) – दिल्ली सल्तनत का पहला वंश
1206 से 1290 ई. तक दिल्ली सल्तनत के सुल्तान गुलाम वंश के सुल्तानों के नाम से विख्यात हुए, जिसका संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था। यद्यपि वे इस वंश के नहीं थे, वे सभी तुर्क थे तथा उनके वंश पृथक-पृथक थे। साथ ही साथ वे स्वतंत्र माता-पिता की संतान थे। अतः इन सुल्तानों को गुलाम वंश का सुल्तान कहने के स्थान पर प्रारंभिक तुर्क सुल्तान या दिल्ली के मामलूक सुल्तान कहना अधिक उपयुक्त है।
कुतुबुद्दीन ऐबक का इतिहास और स्थापत्य कला
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कुतुबुद्दीन ऐबक – गुलाम वंश का संस्थापक
1206 ई. से 1210 ई. के मध्य में कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। दास वंश या गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था। ऐबक का शाब्दिक अर्थ “चन्द्रमा का स्वामी” होता है। मिनहाज-उस-सिराज के अनुसार ऐबक की एक उंगली टूटी थी, इसिलिये वह ऐबक-ए शल (विकलांग ऐबक) कहलाता था। वह ऐबक जनजाति का तुर्क था। यह जनजाति अपने सुंदर स्त्री-पुरुषों के लिए प्रसिद्ध थी। उसके माता-पिता तुर्किस्तान के निवासी थे। माँ-बाप गरीब थे इसलिए बचपन में उसे काजी अब्दुल अजीज कोकी को निशापुर में बेच दिया। काजी अपनी पवित्रता के लिए अबू हनीफा द्वितीय के नाम से प्रसिद्ध था। ऐबक बचपन से अति सुरीले स्वर में कुरान पढ़ता था, जिस कारण वह कुरान-ख्वां (कुरान का पाठ करने वाला) के नाम से प्रसिद्ध हुआ। बाद में उसे निशापुर से गजनी लाया गया, जहाँ उसे गोरी ने खरीद लिया। अपनी प्रतिभा, लगन और ईमानदारी के बल पर शीघ्र ही ऐबक ने गोरी का विश्वास प्राप्त कर लिया। गोरी ने उसे ‘मलिक’ और बाद में “अमीर-ए-आखूर” (अश्वशाला का प्रधान) के पद पर प्रोन्नत कर दिया। अदब-उल-हर्ब के लेखक फ़क्र-ए- मुदब्बिर के अनुसार “सन 1206 ई. में जब मुहम्मद गोरी खोखरो का दमन कर गजनी वापस जा रहा था तो औपचारिक रूप से कुतुबुद्दीन ऐबक को वायसराय की शक्तियाँ प्रदान की। मलिक के पद पर उसकी पदोन्नति की गई और उसे भारतीय साम्राज्य का ‘वली अहद’ (उत्तराधिकारी) नियुक्त किया गया।” खालिक अहमद निजामी कुतुबुद्दीन ऐबक को ‘वली अहद’ बनाये जाने की बात को सही नहीं मानते। लेकिन वास्तव में भारत में तुर्की राज्य का संस्थापक ऐबक को ही माना जाता है। क्योंकि, उसने भारत के तुर्की राज्य को मध्य एशियाई राजनीति से बचाए रखा तथा इसके स्वतंत्र अस्तित्व के लिए प्रयत्न किया था।
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1206 ई.में गोरी की मृत्यु के तीन माह पश्चात जून 1206 ई. में ऐबक ने अपना राज्याभिषेक करवाया। उसने अपनी राजधानी लाहौर को बनाया। राज्यारोहण के समय ऐबक ने सुल्तान की उपाधि धारण नहीं की थी। वह ‘मलिक एवं ‘सिपहसालार‘ की पदवियों से ही सन्तुष्ट रहा। सन 1208 ई. में सुलतान गयासुद्दीन महमूद ने कुतुबुद्दीन ऐबक को दासता से मुक्त कर दिया और वैधानिक रूप से दिल्ली का सुल्तान स्वीकार कर लिया। ऐबक ने दास्य मुक्ति पत्र की प्राप्ति हेतु निजामुद्दीन अहमद को फ़िरोजकोह भेजा था। उसी के प्रतिवेदन पर गजनी के गोर सुल्तान गियासुद्दीन महमूद ने हसन निजामी के हाथों “दास्य मुक्ति पत्र” ,पत्र, सिंहासन, दूरबाश (दो शीर्षयुक्त राजसी दण्ड), लाल छत्र (सुल्तान का प्रतीक), पताका एवं नक्कारा भेजवाया था। सर्वप्रथम उसी ने ऐबक को सुल्तान की पदवी से विभूषित किया था। अपनी उदारता के कारण कुतुबुद्दीन ऐबक इतना अधिक दान करता था कि उसे “लाख बख्श” (लाखों का दान करने वाला) , पीलबख्श (हाथियों का दान देने वाला), और हातिम द्वितीय आदि नामो से पुकारा जाता था। फरिश्ता के अनुसार “जब जनसाधारण किसी व्यक्ति के असीमित दान की प्रशंसा करते थे तो वह उसे अपने समय का ऐबक कहते थे।” ऐबक ने दिल्ली में ‘कुव्वत-उल-इस्लाम’ और अजमेर में ‘अढाई दिन का झोपड़ा’ नामक मस्जिद का निर्माण करवाया था। उसने दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया, जिसे इल्तुतमिश ने पूरा करवाया। सुल्तान फिरोजशाह तुगलक के शासनकाल में इसकी चौथी मंजिल को काफी क्षति पहुंची थी, जिस पर फिरोजशाह तुगलक ने चौथी मंजिल के स्थान पर दो मंजिल का निर्माण और करवाया। 1210 ई. में ऐबक की लाहौर में चौगान (आधुनिक पोलो) खेलते समय मृत्यु हो गयी। उसे लाहौर में दफनाया गया। हसन निजामी के अनुसार “ऐबक की आज्ञाओं से इस्लाम के उपदेशों का बहुत प्रचार हुआ और धर्म के सूर्य ने ईश्वर की सहायता रूपी अम्बर से हिन्द के देशों पर अपना प्रतिबिम्ब प्रदान किया।”
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कुतुबुद्दीन ऐबक – महत्वपूर्ण MCQs (Objective Questions)
गुलाम वंश का संस्थापक कौन था?
(a) कुतुबुद्दीन ऐबक
(b) अलाउद्दीन खिलजी
(c) इल्तुतमिश
(d) बलबन
स्पष्टीकरण: 1206 ई. में मुइज़ुद्दीन मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद उसके भारतीय साम्राज्य की बागडोर कुतुबुद्दीन ऐबक ने संभाली। उसने लाहौर को केंद्र बनाकर दिल्ली सल्तनत तथा प्रथम तुर्की साम्राज्य (जिसे सामान्यतः ‘गुलाम वंश’ कहा जाता है) की स्थापना की। भारत में तुर्की राज्य की स्थापना का श्रेय उसी को जाता है।
2. गुलाम वंश का प्रथम शासक कौन था?
(a) इल्तुतमिश
(b) कुतुबुद्दीन ऐबक
(c) आरामशाह
(d) बलबन
स्पष्टीकरण: दिल्ली सल्तनत पर (1206 से 1290 ई.) शासन करने वाले सुल्तानों में प्रथम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक (1206–1210 ई.) ही था। ऐबक के पश्चात उसका पुत्र आराम शाह कुछ माह के लिए गद्दी पर बैठा और उसके बाद इल्तुतमिश सुल्तान बना। परीक्षा की दृष्टि से ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि ऐबक प्रथम शासक था, जबकि इल्तुतमिश को दिल्ली सल्तनत का प्रथम वास्तविक सुल्तान माना जाता है।
3.कुतुबुद्दीन ऐबक की राजधानी थी—
(a) दिल्ली
(b) लाहौर
(c) अजमेर
(d) लखनौती
स्पष्टीकरण: ऐबक ने दिल्ली को अपनी राजधानी कभी नहीं बनाया। उसने जून 1206 ई. में राज्यारोहण के समय लाहौर को अपनी राजधानी बनाया था। अपने पूरे चार वर्ष के अल्पकालीन शासनकाल का संचालन लाहौर से ही किया
4. दिल्ली सल्तनत का कौन सा सुल्तान “कुरान-ख्वां“ के नाम से जाना जाता है?
(a) कुतुबुद्दीन ऐबक
(b) बलबन
(c) इल्तुतमिश
(d) अलाउद्दीन खिलजी
स्पष्टीकरण: ऐबक को बचपन में निशापुर के काज़ी अब्दुल अजीज कोकी ने खरीदा था। काज़ी के संरक्षण में ही उसने सुरीले और शुद्ध स्वर में कुरान का पाठ करना सीख लिया था, जिस कारण उसे ‘कुरान-ख्वां’ (कुरान का पाठ करने वाला) के नाम से बुलाया जाने लगा।
5. “अढ़ाई दिन का झोंपड़ा” क्या है?
(a) संत की झोपड़ी
(b) मंदिर
(c) मस्जिद
(d) मीनार
स्पष्टीकरण: ‘अढ़ाई दिन का झोंपड़ा’ अजमेर (राजस्थान) में स्थित एक ऐतिहासिक मस्जिद है। मूल रूप से यह प्रसिद्ध संस्कृत महाविद्यालय था। इसका निर्माण चाहमान (चौहान) शासक विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) द्वारा किया गया था। इस संस्कृत महाविद्यालय को तराइन के युद्ध के पश्चात कुतुबुद्दीन ऐबक के आदेश पर इसे मस्जिद के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। इसके स्थापत्य में आज भी प्राचीन भारतीय स्तंभ एवं कलाकृतियाँ दिखाई देती हैं।
6.निम्मलिखित में से किसने प्रसिद्ध क़ुतुब मीनार के निर्माण में योगदान नहीं दिया?
(a) इल्तुतमिश
(b) कुतुबुद्दीन ऐबक
(c) फिरोजशाह तुगलक
(d) ग़ियासुद्दीन तुग़लक़
स्पष्टीकरण: दिल्ली स्थित प्रसिद्ध कुतुब मीनार के निर्माण कार्य को कुतुबुद्दीन ऐबक ने प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में प्रारंभ कराया (प्रथम मंजिल)। इल्तुतमिश ने इसे चार मंजिलों तक बनवाकर पूरा करवाया तथा बाद में फ़िरोज़शाह तुगलक के शासनकाल में आकाशीय बिजली से चौथी मंजिल क्षतिग्रस्त हो गई थी। क्षतिग्रस्त चौथी मंजिल के स्थान फ़िरोज़शाह तुगलक के शासनकाल में दो नई मंजिलों का पुनः निर्माण कराया गया। तुगलक वंश के संस्थापक ग़ियासुद्दीन तुग़लक़ का इसके निर्माण या जीर्णोद्धार से कोई संबंध नहीं था।
7. कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु कैसे हुई?
(a) उनके एक महत्वाकांक्षी कुलीन व्यक्ति ने कपट से छुरा मारकर उनकी हत्या कर दी।
(b) पंजाब पर अधिकार जमाने के लिए गजनी के शासक ताजुद्दीन यल्दौज के साथ युद्ध में उनकी मृत्यु हुई।
(c) बुन्देलखण्ड के किले का घेरा डालते समय उन्हें चोटें लगी जिसके कारण बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
(d) चौगान खेलते समय घोड़े से गिरने के पश्चात उनकी मृत्यु हो गई।
स्पष्टीकरण: ऐबक नवंबर 1210 ई. में लाहौर में चौगान (आधुनिक पोलो खेल) का खेल खेल रहे थे, उसी समय घोड़े से अचानक गिर जाने के कारण ऐबक को गंभीर चोटें आईं, जिस कारण उनकी मृत्यु हो गई।
8.निम्नलिखित में से किसने दिल्ली को राजधानी के रूप में स्थापित किया था?
(a) इल्तुतमिश
(b) कुतुबुद्दीन ऐबक
(c) रजिया
(d) मुइज़ुद्दीन गोरी
स्पष्टीकरण: कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपने शासन को लाहौर से ही संचालित किया था। ऐबक की मृत्यु के बाद इल्तुतमिश ही वह पहला सुल्तान था जिसने 1211 ई. में राजधानी को लाहौर से स्थानांतरित करके दिल्ली को सल्तनत की राजधानी बनाया।
9. निम्नलिखित में से किसने पंजाब के लिए कुतुबुद्दीन ऐबक से संघर्ष किया?
(a) नासिरुद्दीन कुबाचा
(b) ताजुद्दीन यल्दौज
(c) इख़्तियारूद्दीन
(d) इल्तुतमिश
स्पष्टीकरण: गोरी की मृत्यु के बाद पंजाब और लाहौर को गज़नी के शासक ताजुद्दीन यल्दौज अपने अधिकार क्षेत्र में होने का दावा किया। पंजाब के अधिकार क्षेत्र को लेकर ऐबक को यल्दौज से निरंतर संघर्ष करना पड़ा।
10. सल्तनत के किस सुल्तान ने सर्वप्रथम अपनी राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की थी?
(a) कुतुबुद्दीन ऐबक
(b) आराम शाह
(c) इल्तुतमिश
(d) बलबन
स्पष्टीकरण: सल्तनत काल में दिल्ली को सर्वप्रथम राजधानी बनाने का श्रेय इल्तुतमिश को जाता है। (छात्रों के भ्रम निवारण हेतु विकल्प में ऐबक का नाम शामिल किया जाता है, किंतु ऐबक की राजधानी लाहौर थी)।
11. निम्नलिखित में से कौन शासक पृथ्वीराज चौहान के नाम से प्रसिद्ध है?
(a) पृथ्वीराज द्वितीय
(b) पृथ्वीराज प्रथम
(c) पृथ्वीराज तृतीय
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
स्पष्टीकरण: तराइन के प्रथम व द्वितीय युद्ध में भाग लेने वाले चहमान (चौहान) वंश के प्रसिद्ध शासक पृथ्वीराज तृतीय थे। इन्हें ही भारतीय इतिहास में ‘पृथ्वीराज चौहान’ या ‘राय पिथोरा’ के नाम से जाना जाता हैं।
12. “भारतीय गौरव (यश) का अंतिम सूर्य” किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(a) पृथ्वीराज चौहान
(b) शिवजी
(c) महाराणा प्रताप
(d) हेमू
स्पष्टीकरण: प्रसिद्ध इतिहासकार वी. ए. स्मिथ तथा कई पारंपरिक विद्वानों ने मध्यकालीन भारत के संदर्भ में तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) से पूर्व अंतिम शक्तिशाली हिन्दू सम्राट के रूप में पृथ्वीराज चौहान (तृतीय) के लिए यह कथन प्रयुक्त किया है।
13. चंगेज ख़ाँ के अधीन मंगोलों ने भारत पर आक्रमण किया था–
(a) कुतुबुद्दीन ऐबक के शासनकाल में
(b) इल्तुतमिश के शासनकाल में
(c) बलबन के शासनकाल में
(d) गयासुद्दीन के शासनकाल में
स्पष्टीकरण: इल्तुतमिश के शासनकाल में 1221 ई. में कुवारिज्म के शाह के पुत्र जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा करते हुए चंगेज़ ख़ाँ के नेतृत्व में मंगोल भारत की उत्तर-पश्चिमी सीमा (सिंधु नदी) तक पहुँचे थे।
14. टंकों/टंका पर टकसाल का नाम अंकित करने की प्रथा का प्रारंभ किसने किया?
(a) कुतुबुद्दीन ऐबक ने
(b) मुइज्जुद्दीन ने
(c) इल्तुतमिश ने
(d) रजिया ने
स्पष्टीकरण: सिक्कों पर टकसाल (Mint) का नाम अंकित करने की परंपरा को प्रारंभ करने वाला दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान इल्तुतमिश था। जिसने शुद्ध अरबी शैली के सिक्के (चांदी का टंका और तांबे का जीतल) भी चलाए।
15. भारत के किस मध्यकालीन शासक ने “इक्ता व्यवस्था” प्रारम्भ की थी?
(a) कुतुबुद्दीन ऐबक
(b) इल्तुतमिश
(c) बलबन
(d) अलाउद्दीन खिलजी
स्पष्टीकरण: ‘इक्ता प्रणाली’ की शुरुआत इल्तुतमिश ने की थी। इस प्रणालीके द्वारा उसने भारत में सामंती व्यवस्था को समाप्त करने और साम्राज्य को प्रशासनिक ईकाई में बांटकर अधिकारियों को वेतन के बदले भूमि आवंटित की।
16. निम्नलिखित में से किसने सर्वप्रथम ‘सुल्तान‘ की उपाधि धारण की थी?
(a) कुतुबुद्दीन ऐबक
(b) आरामशाह
(c) रुख़नुद्दीन फ़िरोज़
(d) इल्तुतमिश
स्पष्टीकरण: ऐबक ने केवल ‘मलिक’ और ‘सिपाहसालार’ की उपाधियाँ ही धारण की थीं। 1229 ई. में बगदाद के अब्बासी खलीफा अल-मुस्तंसिर बिल्लाह से ‘खिलअत’ (स्वीकृति पत्र) प्राप्त कर वैधानिक रूप से ‘सुल्तान-ए-आज़म’ की उपाधि धारण करने वाला इल्तुतमिश सल्तनत का प्रथम शासक था ।
17. निम्नलिखित में से कौन रात्रि में अधिकतर समय प्रार्थना एवं चिंतन में व्यतीत करता था?
(a) बलबन
(b) रुकनुद्दीन फिरोज
(c) इल्तुतमिश
(d) कुतुबुद्दीन ऐबक
स्पष्टीकरण: समकालीन इतिहासकार मिन्हाज-उस-सिराज ने कहा कि “इल्तुतमिश एक अत्यंत धर्मनिष्ठ शासक था जो रात्रि का अधिकांश समय ईश्वर की प्रार्थना, इबादत और गंभीर चिंतन में व्यतीत करता था।’’
18. इक्ता वह भूमि होती थी, जिसकी आय पर—
(a) नागरिक प्रशासन का नियंत्रण था।
(b) सैन्य प्रशासन का नियंत्रण था।
(c) काजी का नियंत्रण था।
(d) वक्फ का नियंत्रण था।
स्पष्टीकरण: सल्तनत काल में इक्ता का अर्थ हैं ‘हस्तांतरणीय राजस्व आबंटन (Revenue Assignment)’। इस भूमि से प्राप्त होने आय (राजस्व) पर मुख्य रूप से सैन्य प्रशासन तथा इक्तादारों (मुक्ति/वली) के सैन्य रख-रखाव का नियंत्रण होता था।
19. कुतुब मीनार का निर्माण किस सूफी संत की स्मृति में कराया गया था?
(a) बाबा फरीद
(b) निजामुद्दीन औलिया
(c) नासिरुद्दीन चिराग़-ए-देहलवी
(d) कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी
स्पष्टीकरण: चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की याद (स्मृति) एवं सम्मान में दिल्ली स्थित कुतुब मीनार का निर्माण ऐबक ने प्रारंभ करवाया था।
20. ‘गुलामों का गुलाम‘ किसे कहा गया था?
(a)कुतुबुद्दीन ऐबक
(b) मुहम्मद गोरी
(c) बलबन
(d) इल्तुतमिश
स्पष्टीकरण: इल्तुतमिश को मध्यकालीन भारतीय इतिहास में ‘गुलामों का गुलाम’ कहा जाता है। क्योंकि इल्तुतमिश ऐबक का खरीदा हुआ गुलाम था और कुतुबुद्दीन ऐबक मोहम्मद गोरी का गुलाम (दास) था।
21.मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारतीय प्रांतों पर शासन किया एवं एक राजवंश की स्थापना की, जिसका नाम था—
(a)ऐबक वंश
(b) गुलाम वंश
(c) सल्तनत वंश
(d) (b) एवं (c) दोनो
स्पष्टीकरण: गोरी की मृत्यु के बाद 1206 ई. में ऐबक द्वारा स्थापित राजवंश को प्रारंभिक इतिहासकारों और जनसामान्य द्वारा ‘गुलाम वंश’ नाम दिया गया, यद्यपि बाद में इसके लिए ‘मामलूक’ शब्द स्वीकार किया गया।
22. कुतुबुद्दीन ऐबक को दासता से मुक्ति कब प्राप्त हुई?
(a)1206 ई. में
(b) 1207 ई.में
(c) 1208-09 ई. में
(d) 1210 ई.में
स्पष्टीकरण: गज़नी के नए सुल्तान गयासुद्दीन महमूद (गोरी के भतीजे) द्वारा ऐबक को 1208-09 ई. में विधिवत रूप से ‘दास्य मुक्ति पत्र’ और सुल्तान के राजसी चिह्न प्रदान किये गए थे।
23. कुतुबुद्दीन ऐबक ने किस स्थान से शासन का संचालन किया?
(a)दिल्ली
(b) लाहौर
(c) अजमेर
(d)मुल्तान
स्पष्टीकरण: ऐबक ने अपने संपूर्ण शासनकाल (1206-1210 ई.) में लाहौर को ही केंद्र बनाकर सल्तनत के शासन का संचालन किया था।
24. मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक को दफनाया गया था—
(a)दिल्ली में
(b) रावलपिण्डी में
(c) इस्लामाबाद में
(d) लाहौर में
स्पष्टीकरण: ऐबक का मकबरा लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) के अनारकली बाज़ार के पास स्थित है। पोलो खेलते समय 1210 ई. कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद उसका शव लाहौर में ही दफनाया गया था।
25. दिल्ली सल्तनत का पहला संप्रभु (वैधानिक) या प्रभुत्वसंपन्न शासक था–
(a)कुतुबुद्दीन ऐबक
(b) इल्तुतमिश
(c) आरामशाह
(d) नासिरुद्दीन महमूद
स्पष्टीकरण: ऐबक दिल्ली सल्तनत का संस्थापक तो था, लेकिन वह वैधानिक सुल्तान नहीं था। इल्तुतमिश ने खलीफा से अधिकार पत्र प्राप्त किया और दिल्ली को स्थायी राजधानी बनाया। इसीलिए उसे दिल्ली सल्तनत का पहला संप्रभु और प्रभुत्वसंपन्न शासक माना जाता है।
प्रारंभिक तुर्क शासक: महत्वपूर्ण तुलनात्मक तथ्य (Quick Revision)
| विषय / नीति | कुतबुद्दीन ऐबक | इल्तुतमिश |
| राजधानी | लाहौर | दिल्ली (प्रथम सुल्तान जिसने दिल्ली बनाई) |
| उपाधि | मलिक, सिपहसालार, लाखबख्श | सुल्तान-ए-आज़म (वैधानिक सुल्तान) |
| सिक्के / इक्ता | कोई सिक्के/इक्ता व्यवस्था नहीं | शुद्ध अरबी सिक्के (टंका व जीतल) एवं इक्ता प्रणाली |
| पहचान | गुलाम वंश का संस्थापक | ‘गुलामों का गुलाम’ एवं वास्तविक संस्थापक |
संदर्भ एवं प्रामाणिक ग्रंथ सूची (References & Bibliography)
I. मूल फारसी प्राथमिक स्रोत (Primary Sources)
- हसन निज़ामी — ताज-उल-माआसिर, अनुवाद: के. ए. निज़ामी, दिल्ली: इदारा-ए-अदबियात-ए-दिल्ली, 1972.
- फ़क्र-ए-मुदब्बिर — अदब-उल-हर्ब व शजाअत, संपादन: अहमद सुहैली ख़्वानसारी, तेहरान: इक़बाल पब्लिकेशंस, 1959.
- मिन्हाज-उस-सिराज जूर्जानी — तबकात-ए-नासिरी (खंड 1 व 2), अनुवाद: एच. जी. रैवर्टी, कोलकाता: एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल, 1897.
- मोहम्मद कासिम फ़रिश्ता — तारीख-ए-फ़रिश्ता (गुलाम वंश अध्याय), अनुवाद: जॉन ब्रिग्स, लंदन: लोंगमैन एंड कंपनी, 1829.
II. आधुनिक प्रामाणिक ग्रंथ एवं संदर्भ पुस्तके (Secondary Sources)
- हबीबुल्लाह, ए. बी. एम. — द फ़ाउंडेशंस ऑफ़ मुस्लिम रूल इन इंडिया (The Foundation of Muslim Rule in India), इलाहाबाद: सेंट्रल बुक डिपो, 1961।
- वर्मा, डॉ. हरिश्चन्द्र (संपादक) — मध्यकालीन भारत (भाग-1: 750-1540 ई.), नई दिल्ली: हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2010.
- चन्द्र, प्रो. सतीश — मध्यकालीन भारत: सल्तनत से मुगल काल तक (1206-1526), नई दिल्ली: जवाहर पब्लिशर्स, 2007.
- हबीब, मोहम्मद एवं के. ए. निज़ामी (संपादक) — दिल्ली सल्तनत (ए कॉम्प्रिहेंसिव हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया, खंड 5), नई दिल्ली: पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस, 1992.
- त्रिपाठी, डॉ. रामप्रसाद — राजय के कुछ प्रसिद्ध पहलू (Some Aspects of Muslim Administration), इलाहाबाद: इंडियन प्रेस, 1956.
III. पुरातात्विक एवं स्थापत्य संबंधी संदर्भ (Archaeology & Architecture)
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) — प्रारंभिक मध्यकालीन स्मारक एवं कुतुब परिसर रिपोर्ट, नई दिल्ली: महानिदेशक ए.एस.आई., 1999.
- नाथ, आर. — अ हिस्ट्री ऑफ़ सल्तनत आर्किटेक्चर (A History of Sultanate Architecture), नई दिल्ली: अभिनव पब्लिकेशंस, 1978.
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Dr. Om Prakash Singh
Assistant Professor & Head, Department of History
Constituent Government College, Thakurdwara, Moradabad (U.P)
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