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मौर्य वंश के प्रमुख राजाओं में अशोक का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जिन्होंने कलिंग युद्ध की भीषणता देखकर हिंसा का परित्याग किया और बौद्ध धर्म के मार्ग पर चल पड़े। उन्होंने अपने शासन को करुणा, सत्य, और अहिंसा के मूल्यों पर आधारित किया तथा जनता के कल्याण को सर्वोच्च लक्ष्य माना। उनके नेतृत्व में बौद्ध विचारधारा भारत से बाहर कई देशों तक पहुँची और अशोक का नाम शांति, नीति और धर्मपरायण शासन के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।

प्रश्न- अशोक की गिनती विश्व के महानतम सम्राटो में क्यों की जाती है? उसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए?
परिचय: अशोक महान का ऐतिहासिक महत्व
अशोक न केवल भारत मे ही वरन विश्व के महान सम्राटो में से एक था। इसे लगभग सभी सम्राटो ने स्वीकार किया है, कल्याणकारी, कर्तव्यपरायणता, कुशल प्रशासन तथा सफल सैन्य क्षमता के लिए उसकी बहुत अधिक प्रशंसा की है। शक्ति और समृद्धि की पराकाष्ठा पर पहुंचकर भी मानवता के कष्ट से दुःखी होकर उसने युद्ध को सदा के लिए त्याग दिया। अशोक चन्द्रगुप्त मौर्य के समान शक्तिवान, समुद्रगुप्त जैसा बहुमुखी प्रतिभावाली तथा अकबर जैसा धर्मप्रेमी था। सभी सम्राटो की तुलना करने पर वह सबसे महान सम्राट था। उसकी तुलना रोमन सम्राट कांस्टेनटाइन महान से की जाती हैं। कांस्टेनटाइन स्वार्थबद्व चालाक, अंधविश्वासी, निष्ठुर व्यक्ति था, जिसके कारण सफलतम दूरदर्शिता के महान उदाहरणों में वह महान कहलाने का पात्र नही है, तो इसके विपरीत अशोक की आत्मा विचारवान सबके लिए कल्याणपूर्ण सम्राट था। और वह उच्च आदर्शो, सतत प्रयत्नों, एकांत निष्ठा और आश्चर्यजनक उपाय वाला व्यक्ति था। ऐसे तो इतिहास में अनेक राजा हुए जो अशोक के समान महान थे किन्तु वह कार्य जिसके कारण अशोक सर्वव्यापी और प्रशंसा के योग्य है; किसी ने ही किया हो। अशोक का कल्याणकारी राज्य तथा उसका नैतिक व्यवस्था को लेकर चलना,उसका प्रशंसनीय कार्य था। जिसके कारण वह महान सम्राट कहलाया। इन्ही गुणों के कारण इतिहासकारो द्वारा महान सम्राट नेपोलियन, सिकन्दर और सीजर भी अशोक के समान छोटे नजर आते है।
उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट हो जाता है कि अशोक में महानता के गुण पर्याप्त मात्रा में विद्यमान थे। उसकी महानता के प्रमुख कारणों को बेहतर ढंग से सममझने के लिए उनका अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत किया जा सकता है—
1. अशोक: एक महान विजेता (Great Conqueror)
अशोक एक महान विजेता था। उसने अपने पिता के महान साम्राज्य में कश्मीर और कलिंग राज्य को सम्मिलत किया। उसके पिता बिन्दूसार ने भी कलिंग को अपने अधिकार में करने का प्रयत्न किया था किन्तु वह अपने प्रयास में सफल नही हो पाया था। उसने कलिंग पर विजय करके अपने पिता के अधूरे कार्य को पूर्ण किया। अशोक की ख्याति युद्ध-विजेता के रूप में उतनी अधिक नही है, जितनी कि धर्म विजेता के रूप में। कलिंग युद्ध के बाद उसने युद्ध का हमेशा के लिए परित्याग कर दिया और धर्म विजय की नीति का अनुसरण किया, वह उसका एक महान कार्य था। वह शरीर पर ही नही जनता की आत्मा पर विजय प्राप्त करना चाहता था। इस कार्य के लिए उसने जीवन भर कठिन परिश्रम किया। उसने धर्माचार्यो तथा धर्म प्रचारकों की एक विशाल सेना का संगठन किया। जिसमे जनता के नैतिक तथा धार्मिक आदेशो का प्रचार किया। जिसने न केवल सम्पूर्ण भारत मे वरन विदेशो में भी प्रचार कार्य किया। उसको आशातीत सफलता प्राप्त हुई। केवल इतना ही नही वरन उसकी सफलता स्थाई रही लगभग समस्त एशिया में उसने अपने धर्म का प्रचार किया। उसके प्रयत्नों से भारत विश्वगुरु के पद पर आसीन हुआ।
2. अशोक: महान धर्म प्रचारक (Great Propagator of Buddhism)
अशोक एक महान विजेता होने के साथ ही साथ एक धर्म प्रचारक भी था। जिसने स्थानीय धर्म को विश्व धर्म के पद पर आसीन कर दिया। बौद्ध धर्म स्वीकार करने के पश्चात उसने तन, मन और धन से उस धर्म की सेवा के साथ-साथ मानव का नैतिक आचरण उन्नत करने का प्रयत्न किया। उसके धर्म मे संकीर्णता का जरा सा भी अंश नही था। उसमे धार्मिक मदांधता नही थी। वह ‘वसुंधव-कुटुम्बकम’ का अनुयायी था। इस आदर्श की स्थापना के लिए उसने जीवन भर प्रयत्न किया। उसकी धार्मिक नीति पूर्णतः उदार थी। वह समस्त धर्मो तथा उनके अनुयायियों को आदर और श्रद्धा की दृष्टि से देखता था। उन पर भी उसका संरक्षण था। उसने मुसलमानों के समान धर्म प्रचार बाहुबल से नही किया वरन आत्मबल, शांति तथा सदभावना के द्वारा किया।
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3. अशोक: महान शासक (Great Administrator)
अशोक की गणना न केवल भारत के वरन विश्व के महान शासको में की जाती है। कलिंग युद्ध के पश्चात उसने अपने जीवन का लक्ष्य प्रजा की उन्नति बनाया। उसने अपनी प्रजा को अपने पुत्र के समान समझा और उनको उन्नत मार्ग तक पहुचाने के लिए अकथनीय प्रयत्न किये। उसने आमोद-प्रमोद, भोग-विलास का जीवन त्याग कर एक आदर्श व्यक्ति का जीवन व्यतीत करना आराम्भ कर दिया। उसने बिहार- यात्राओं के स्थान पर धर्म-यात्राएं करनी आराम्भ कर दी और प्रजा को सदुपदेश दिए। उसके शासन में पूर्णतः शांति रही। उसने धर्म-महामात्रो की नियुक्ति की, जिन्होंने प्रजा के नैतिक तथा आध्यात्मिक जीवन को उन्नत करने का प्रयत्न किया। एक शासक के रूप में अशोक की महानता इस रूप में पायी जाती है कि देश के राजनीतिक जीवन में उसने आदर्शवादिता, पवित्रता तथा कर्तव्यपरायणता का समावेश किया। एक भिक्षुक जैसा सादा जीवन व्यतीत कर राज-सुलभ सभी सुखों का त्याग कर प्रजा के इहलौकिक हित-चिंतन में संलग्न रहकर अशोक ने ऐसा आदर्श विश्व के सम्राट के समक्ष उपस्थित किया जो सर्वथा अनुकरणीय है।
4. अशोक: महान निर्माता (Great Builder)
अशोक एक महान निर्माता भी था। बौद्ध परम्पराओ के अनुसार उसने 84,000 स्तूपो का निर्माण करवाया। उसने कनकमुनि के स्तूपो का संवर्द्धन करवाया था। बराबर की पहाड़ी को कटवाकर आजीविकों के लिए गुफाओ का निर्माण करवाया था। उसके स्तम्भ वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण है।
5. अशोक: महान राष्ट्र निर्माता (Nation Builder)
अशोक एक महान राष्ट्र- निर्माता भी था। उसने भारत को एक राष्ट्र के रूप में परिणित करने का अकथनीय प्रयत्न किया, उसने पाली भाषा का प्रयोग किया जो साधारण जनता की भाषा थी। इसके द्वारा वह राष्ट्र में एकता की स्थापना करना चाहता था। उसने ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया और खरोष्ठी लिपि का प्रयोग तो केवल पश्चिमी प्रदेशो में ही किया। उसने सम्पूर्ण देश को एकता के सूत्र में संगठित करने के कार्य किये जिनके माध्यम से सम्पूर्ण देश को एकता के सूत्र में बांध दिया और सम्पूर्ण देश के लिए एक समान प्रशासन को लागू किया। इसके परिणामस्वरूप भारत मे धार्मिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में समानता स्पष्ट रूप से दिखलाई देती है।
अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु किए गए प्रयास

बौद्ध धर्म को स्वीकार करने के बाद अशोक ने उस धर्म के प्रचार के लिए भरसक प्रयत्न किया। उसके संरक्षण में आने से पूर्व बौद्ध धर्म भारत के एक छोटे से भाग का धर्म था। उसके अनुयायियों की संख्या बहुत अधिक नही थी और उसका कार्य क्षेत्र बहुत सीमित था। अशोक द्वारा किये गये उपायों से इस धर्म ने विश्व धर्म का स्थान प्राप्त कर लिया। अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए किए गए कार्यो का निम्नलिखित संदर्भो के अंतर्गत वर्णन कर सकते है—
1. व्यक्तिगत उदाहरण द्वारा प्रचार
कलिंग युद्ध के उपरान्त अशोक के व्यक्तित्व पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। उसने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर उसके आदर्शो के अनुसार आचरण करना आराम्भ कर दिया था। उसने आमोद-प्रमोद और मांस खाना भी छोड़ दिया था। उसके इन कार्यो का प्रभाव जनता पर विशेष रूप से पड़ा और जनता ने अपने सम्राट के अनुसार पवित्र जीवन व्यतीत करना प्रारम्भ कर दिया और बहुत से व्यक्ति बौद्ध धर्म मे दीक्षित होकर उसके सिद्धान्तों तथा उपदेशो का पालन करने लगे।
2. धर्म यात्राएँ (Dhamma Yatras)
राज्य की ओर से अशोक ने धर्म यात्राओं की प्रथा चलाई। अशोक स्वयं और उसके मुख्य कर्मचारी धार्मिक स्थानों और धर्म के प्रचार के लिए यात्रा करते थे और रास्ते मे जनता के सम्पर्क में आते थे। और जनता को बौद्ध धर्म के उपदेशो एवं सिद्धान्तों के बारे में समझाते थे। जनता पर उनके उपदेशो का बहुत अधिक प्रभाव पड़ा।
3. धर्म श्रवण व्यवस्था (Dhamma Meetings)
अशोक द्वारा धम्म के प्रचार-प्रसार के लिए धर्म-श्रावण की व्यवस्था की गई थी, जिसमे धार्मिक विषयो के ऊपर भाषण, कथा आदि होते थे। इस कार्य मे राजुक, प्रादेशिक, युक्त आदि अधिकारी लगे होते थे।
4. दान व्यवस्था (Charitable Works)
अशोक राजकोष से बहुत सा धन रोगियों, भूखों और दीन-दुःखियों में वितरण करता था। इसके अतिरिक्त वह धार्मिक संस्थाओं को भी दान दिया करता था, जिसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक प्रचार होता था।
5. शिलालेख और स्तंभ लेख (Edicts of Ashoka)
अशोक ने बौद्ध धर्म को जनसाधारण तक पंहुचाने के लिए उस धर्म के उपदेश एवं सिद्धान्तों को शिलालेखों, स्तम्भो और पर्वतों की गुफाओ में उत्कीर्ण करवाया। उस कार्य के लिए उसने एक अलग विभाग की स्थापना की। उसके इस कार्य से यह धर्म सुलभ और स्थायी बन गया। इन कार्यो से धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण सहयोग मिला। उसने इनको साम्राज्य के विभिन्न स्थानों पर गड़वाया उसके द्वारा अंकित किये गए शिलालेख आज भी मिलते है।
6. पाली भाषा का प्रयोग
बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अशोक ने जनसाधारण के बीच बोली जाने वाली पाली भाषा का प्रयोग किया। बौद्ध धर्म ग्रंथो में भी इसी भाषा का प्रयोग हुआ है। जनसाधारण की भाषा होने के कारण लोगो को बौद्ध धर्म को समंझने के लिए तनिक भी कठिनाई का अनुभव नही हुआ।
निष्कर्ष (Conclusion)
सम्राट अशोक का व्यक्तित्व भारतीय इतिहास में नैतिकता, करुणा और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक है। उन्होंने शासन को केवल सत्ता का माध्यम न मानकर जनकल्याण और मानवता की सेवा का मार्ग बनाया। उनके प्रशासनिक सुधारों और धर्म नीति ने न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाया। जहाँ अन्य विजेता केवल भौतिक साम्राज्य स्थापित कर सके, वहीं अशोक ने हृदयों पर शासन किया। इस दृष्टि से वे वास्तव में ऐसे शासक थे जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई।
FAQ (Frequently Asked Questions)
Q1. अशोक महान की कौन-सी नीतियाँ उन्हें अन्य शासकों से अलग बनाती हैं?
उत्तर: अशोक महान को विश्व के महानतम सम्राटों में इसलिए गिना जाता है क्योंकि उन्होंने अपने शासनकाल में शक्ति और विजय की बजाय धर्म, करुणा और मानवता को सर्वोपरि माना। कलिंग युद्ध की भीषणता ने उनके मन को गहराई से प्रभावित किया, जिसके बाद उन्होंने हिंसा का त्याग कर अहिंसा और नैतिकता के मार्ग को अपनाया। उन्होंने प्रजा के कल्याण, समानता, और सत्य पर आधारित शासन चलाया तथा अपने आदेशों के माध्यम से लोगों को सदाचार और सहिष्णुता का संदेश दिया। इस मानवीय दृष्टिकोण के कारण ही अशोक का नाम विश्व इतिहास में एक आदर्श शासक के रूप में लिया जाता है।
Q2. अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए कौन-कौन से प्रयास किए?
उत्तर: अशोक ने बौद्ध धर्म को जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए अनेक कार्य किए। उन्होंने धर्म प्रचारकों को विभिन्न देशों में भेजा, तीर्थ यात्राएँ कीं, शिलालेखों के माध्यम से धर्म-संदेश लिखवाए और प्रजा के कल्याण के लिए दान एवं सामाजिक योजनाएँ शुरू कीं। इन प्रयासों से बौद्ध विचार पूरे एशिया में फैल गए।
Q3. कलिंग युद्ध का अशोक के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: कलिंग युद्ध में हुए भारी विनाश ने अशोक के मन को झकझोर दिया। उन्होंने समझा कि वास्तविक विजय तलवार से नहीं, बल्कि दया और सेवा से मिलती है। परिणामस्वरूप उन्होंने हिंसा का त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया और जीवन को अहिंसा, करुणा तथा मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
Q4. अशोक को ‘धर्म विजेता’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: कलिंग युद्ध के पश्चात अशोक ने भौतिक विजय की इच्छा त्याग दी और लोगों के हृदयों को धर्म के माध्यम से जीतने का प्रयास किया। उन्होंने शांति, नैतिकता और मानवता के संदेश से समाज को जोड़ा। इसीलिए उन्हें ‘धर्म विजेता’ कहा जाता है।
Q5. अशोक के शासनकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या थीं?
उत्तर: अशोक के शासन में प्रशासन अधिक संगठित और जनहितकारी बना। उन्होंने धर्म-महामात्रों की नियुक्ति की, सड़कों, स्तूपों और गुफाओं का निर्माण करवाया तथा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार किए। उनके शासनकाल में एकता, स्थिरता और शांति स्थापित हुई।
Q6. अशोक के शिलालेखों का क्या महत्व है?
उत्तर: अशोक के शिलालेख उनके विचारों और नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इनमें धर्म, सामाजिक न्याय, तथा प्रशासनिक सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है। ये लेख भारतीय इतिहास के प्रारंभिक लिखित दस्तावेज़ हैं, जो हमें उस काल की संस्कृति और शासन व्यवस्था की झलक देते हैं।
Q7. अशोक की तुलना सिकंदर और नेपोलियन से क्यों की जाती है?
उत्तर: सिकंदर और नेपोलियन ने तलवार की शक्ति से विश्व को जीतने का प्रयास किया, जबकि अशोक ने करुणा, नीति और धर्म के मार्ग से लोगों के हृदयों को जीता। इसलिए अशोक को न केवल एक विजेता, बल्कि एक मानवतावादी शासक के रूप में अधिक महान माना जाता है।
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