यह चित्र 7वीं शताब्दी के सम्राट हर्षवर्धन के दरबार का दृश्य प्रस्तुत करता है। सिंहासन पर बैठे हर्षवर्धन के आसपास विद्वान वाणभट्ट, बौद्ध भिक्षु और दरबारी उपस्थित हैं। यह दृश्य उनके शासनकाल की सांस्कृतिक समृद्धि, धार्मिक सहिष्णुता और प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक है।

