सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): कारण, 11 सूत्रीय मांगें, दांडी मार्च एवं प्रभाव | Civil Disobedience Movement

सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–1934) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना था,जिसने ब्रिटिश हुकूमत को गिरा दिया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन ने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से देश भर में राष्ट्रीय चेतना फैलाई। इस आंदोलन ने असहयोग आंदोलन के स्थगित होने के बाद उपजी निराशा को दूर करते हुए समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर ला खड़ा किया, खासकर महिलाओं, किसानों और युवाओं को। नीचे आंदोलन की पृष्ठभूमि, डांडी मार्च, ग्यारह महत्वपूर्ण मांगों और इसके दीर्घकालीन परिणामों का विवरण है:

1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की पृष्ठभूमि और प्रमुख कारण

  • असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद की परिस्थितियां: असहयोग आन्दोलन को वापिस लेने के बाद भारतीय परिस्थितियों में बदलाव आये और भारतीय समस्याओं के प्रति अंग्रेज सरकार के न बदलने वाले रवैये ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन के लिए पृष्ठभूमि तैयार की। (वर्ष 1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी ने भी भारतीय किसानों व मजदूरों की स्थिति को अत्यंत दयनीय बना दिया था।)
  • साइमन कमीशन का आगमन (1928): सन 1928 में साइमन कमीशन का आगमन और इसमें एक भी भारतीयों का न शामिल होना! (इसे ‘व्हाइट मैन कमीशन’ भी कहा गया, जिसका विरोध करते समय लाहौर में लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज हुआ था।)
  • व्यापारियों में भय: बम्बई और कलकत्ता में जुझारू कम्युनिस्टों द्वारा चलाये गये मजदूर आन्दोलन से भयभीत भारतीय व्यापारी एवं पूँजीपति।
  • क्रांतिकारी गतिविधियों का पुनः उदय: बंगाल और उत्तर भारत में क्रान्तिकारी गुटों का फिर से उभर आना (जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद की HSRA गतिविधियां तथा सूर्य सेन द्वारा चटगांव शस्त्रागार छापा।)
  • किसान आंदोलन: विभिन्न क्षेत्रों में किसान आन्दोलनों का उभरना।
  • राजनीतिक शून्यता: स्वराज्य पार्टी द्वारा योग्य नेतृत्व न दे सकना।
  • वामपंथी रुझान का नेतृत्व: कांग्रेस के अन्दर ही जवाहरलाल नेहरू व सुभाष चन्द्र बोस जैसे वामपंथी रुझान वाले नेतृत्व का उभरना आदि कारणों ने एक बार पुनः जन आन्दोलन शुरू करने का अवसर प्रदान किया।

2. लाहौर अधिवेशन (1929) और गांधी जी की 11 सूत्रीय मांगें

दिसम्बर 1929 ई० में लाहौर अधिवेशन में गाँधी जी ने पूर्ण स्वराज्य के लिए अहिंसात्मक संघर्ष का विकल्प चुनने का तरीका प्रदान किया! लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी तथा 31 दिसंबर 1929 की रात रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया गया था और यह तय किया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूरे भारत में स्वतंत्रता की घोषणा की जायेगी और इसी तारीख से सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया जायेगा और उसे स्वतंत्रता दिवस भी घोषित किया गया।

गांधी जी अब भी अपने कार्यक्रम योजना के बारे में निश्चित नहीं थे और अब भी आन्दोलन शुरू करने से पहले सरकार से समझौता करने की कोशिश की। उन्होंने प्रशासनिक सुधार के लिए 11 सूत्र पेश किये (यह मांग पत्र ‘यंग इंडिया‘ पत्रिका के माध्यम से लॉर्ड इरविन के समक्ष 31 जनवरी 1930 तक स्वीकार करने हेतु रखा गया था)। उन्होनें कहा कि यदि इरविन इन्हें स्वीकार कर लेंगे तो संघर्ष की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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महात्मा गांधी की 11 सूत्रीय मांगें

  • रुपये की विनिमय दर घटाकर एक शिलिंग 4 पेंस की जाय।
  • भूमि लगान में 50% की कमी की जाय और इसे विधायी नियंत्रण का विषय बनाया जाय।
  • नमक कर और नमक पर सरकार का एकाधिकार समाप्त किया जाय।
  • सर्वोच्च श्रेणी का वेतन आधा किया जाय।
  • सेना खर्च में 50% की कमी की जाय।
  • सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई की जाय।
  • भारतीय कपड़ा उद्योग और जहाजरानी उद्योग को संरक्षण दिया जाय। अन्य 4 मांगें: नशीली वस्तुओं की बिक्री पर रोक, गुप्तचर विभाग (CID) पर नियंत्रण, हथियार कानून में सुधार ताकि नागरिक आत्मरक्षार्थ हथियार रख सकें, और तटीय यातायात आरक्षण विधेयक पारित करना।

यह मांग पत्र अनेक कांग्रेसियों को पूर्ण स्वराज्य से पीछे हटना जान पड़ा फिर भी गांधी जी की इस पर अडिग रहे, किन्तु वायसराय ने इनकी कोई भी बात स्वीकार नहीं की।

ऐतिहासिक डांडी मार्च (12 मार्च – 6 अप्रैल 1930)

अतएव गांधीजी ने निर्णय लिया और 12 मार्च 1930 को अपने चुने हुए अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से डांडी तक ऐतिहासिक यात्रा शुरू किया। इस यात्रा में गांधी जी के साथ कुल 78 (या 79) चुने हुए प्रतिनिधि थे, जिन्होंने 24 दिनों में लगभग 241 मील/390 किमी की दूरी तय की। इस यात्रा के दौरान अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर भी साथ था। सुभाष चंद्र बोस ने इस यात्रा की तुलना नेपोलियन के ‘एल्बा से पेरिस मार्च’ से की थी। वहां 6 अप्रैल 1930 को पहुँचकर गाँधी जी ने समुद्र से मुट्ठी भर नमक उठाकर घोषणा की कि “मैं नमक कानून तोड़ता हूँ”। इसके साथ ही आन्दोलन का एक कार्यक्रम निर्धारित किया गया।

3. आंदोलन का मुख्य कार्यक्रम और तरीका

  1. हर जगह नमक कानून का उल्लंघन किया जाना।
  2. विद्यार्थियों को कॉलेज छोड़ना और सरकारी कर्मचारियों को सरकारी नौकरी छोड़ देनी चाहिए।
  3. विदेशी कपड़ों को जलाया जाना चाहिए।
  4. सरकार को कोई कर नहीं चुकाना चाहिए।
  5. औरतों को शराब की दुकानों पर धरना देना चाहिए।

4. सविनय अवज्ञा आंदोलन का क्षेत्रीय प्रसार और प्रमुख घटनाएं

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की तेजी से बढ़ा और देश के दूसरे क्षेत्रों में फैल गया।

  • तमिलनाडु: सी० राजगोपालाचारी ने तमिलनाडु में (त्रिचिनोपोली से वेदारण्यम तक) नमक यात्रा निकाली।
  • मालाबार: के० केलप्पण ने मालाबार में (कालिकट से पायन्नूर तक) नमक कानून तोड़ा।
  • धरासना सत्याग्रह: सरोजनी नायडू ने धरासना में नमक कानून भंग किया। (धरासना सॉल्ट वर्क्स पर सरोजनी नायडू, इमाम साहब और मणिलाल के नेतृत्व में हुए अहिंसक प्रदर्शन पर अंग्रेजों ने बर्बर लाठीचार्ज किया था, जिसका वर्णन अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने किया था।)
  • जंगल सत्याग्रह: मध्य प्रान्त, महाराष्ट्र, कर्नाटक में जंगल कानून भंग किया गया।
  • चौकीदारी टैक्स का बहिष्कार:  पूर्वी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में (विशेषकर बिहार के छपरा/सारण और बंगाल में) चौकीदारी टैक्स देने से इन्कार किया गया।
  • सीमांत क्षेत्र (लाल कुर्ती आंदोलन):  पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त में अब्दुल गफ्फार खां जिन्हें ‘सीमान्त गांधी’ या ‘फ्रंटियर गांधी’ कहा जाता है के नेतृत्व में ‘लाल कुर्ती आन्दोलन’ (‘खुदाई खिदमतगार’ संगठन) चला।

आंदोलन से जुड़ी अन्य ऐतिहासिक घटनाएं

  • वानर व मंजरी सेना:  लड़कों ने वानर सेना, लड़कियों ने मंजरी सेना का गठन किया।
  • पेशावर की घटना: इसी दौरान पेशावर में गढ़वाल राइफल्स के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से मना कर दिया था।
  • नागालैंड का विद्रोह: नागालैंड में मात्र 13 वर्ष की रानी गाइदिन्ल्यू ने विद्रोह का नेतृत्व किया, जिन्हें नेहरू जी ने ‘रानी’ की उपाधि दी थी।

 इस तरह आन्दोलन में भारतीय जनता के सभी वर्ग – किसानों, व्यवसायियों, बच्चों, महिलाओं आदि सभी का समर्थन प्राप्त हुआ। इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी थी।

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5. गांधी-इरविन समझौता, गोलमेज सम्मेलन एवं द्वितीय चरण

इसी समय जब आन्दोलन पूर्ण उभार पर था गांधी इरविन समझौता (14 फ़रवरी 1931) हुआ (यहसमझौता दिल्ली में 5 मार्च 1931 को अंतिम रूप से हस्ताक्षरित हुआ, इसलिए इसे ‘दिल्ली समझौता’ भी कहते हैं)। जिसके तहत सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित हो गया और गाँधी जी गोलमेज सम्मेलन (द्वितीय गोलमेज सम्मेलन, सितंबर-दिसंबर 1931) में भाग लेने ‘एस.एस. राजपूताना’ जहाज से इंग्लैंड गये।

 वहां से गांधी जी के कुछ हाथ नहीं लगा क्योंकि वहां साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व पर गतिरोध पैदा हो गया था। तब पुनः वापस लौटकर जनवरी 1932 में द्वितीय चरण के रूप में आन्दोलन की शुरुआत करनी पड़ी।

इसी बीच साम्प्रदायिक निर्णय (ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमसे मैकडोनाल्ड द्वारा 16 अगस्त 1932 को घोषित ‘कम्यूनल अवॉर्ड’) के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ। लेकिन बाद गांधी जी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच 24 सितंबर 1932 को ‘पूना पैक्ट’ हो गया।

इसके पश्चात गाँधी जी हरिजन आन्दोलन की तरफ ध्यान देने लगे (गांधी जी ने ‘ऑल इंडिया एंटी-अनटचेबिलिटी लीग‘ और ‘हरिजन’ पत्रिका शुरू की), जिससे सविनय अवज्ञा आन्दोलन कमजोर पड़ गया और अन्ततः 7 अप्रैल 1934 को आन्दोलन वापस ले लिया गया।

6. आंदोलन का निष्कर्ष एवं ऐतिहासिक महत्व

इस प्रकार निष्कर्षतः यही कहा जा सकता है कि इस आन्दोलन से राष्ट्रीय आन्दोलन का क्षेत्रीय विस्तार हुआ, जन सहभागिता बढ़ी तथा राष्ट्रीय आन्दोलन और तीव्र हुआ। यह आंदोलन भले ही तुरंत पूर्ण स्वराज्य न दिला सका हो, लेकिन इसने ब्रिटिश शासन के इकबाल और वैधानिकता को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। इसने भारतीय समाज के दबे-कुचले वर्गों, महिलाओं और ग्रामीण जनता के भीतर निर्भीकता और राष्ट्रीय चेतना का ऐसा बीज बोया, जिसने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और 1947 की स्वतंत्रता की मजबूत नींव रखी।


1. सविनय अवज्ञा आंदोलन कब और किसके नेतृत्व में शुरू हुआ था?

उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ। 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने साबरमती आश्रम से अपने 78 चुने हुए साथियों के साथ दांडी की यात्रा आरंभ की। 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर उन्होंने नमक कानून तोड़ा और नमक कानून के उल्लंघन के साथ ही आंदोलन को व्यापक रूप मिला। धीरे-धीरे यह आंदोलन देश के विभिन्न भागों तक फैल गया।

2. महात्मा गांधी की 11 सूत्रीय मांगों में नमक कर और भूमि लगान से संबंधित क्या मांगें थीं?

उत्तर: गांधी जी की 11 सूत्रीय मांगों में नमक पर सरकार के एकाधिकार को खत्म करना तथा नमक कर समाप्त करने की मांग प्रमुख थी। इसके साथ ही उन्होनें भूमि कर (लगान) को 50 % तक कम करने और इसे विधायी नियंत्रण के अंतर्गत लाने की मांग भी रखी गई थी। इन मांगों के माध्यम से किसानों और सामान्य जनता से जुड़े आर्थिक प्रश्नों को भी उठाया गया था।

3. दांडी मार्च कब शुरू हुआ और इसका सविनय अवज्ञा आंदोलन में क्या महत्व था?

उत्तर: दांडी मार्च 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुआ और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर समाप्त हुआ। गांधी जी ने समुद्र के किनारे पहुँचकर नमक उठाकर नमक कानून को तोड़ा। इससे नमक सत्याग्रह को व्यापक पहचान मिली और सविनय अवज्ञा आंदोलन को देश के विभिन्न क्षेत्रों में फैलने का मौंका मिला।

4. सविनय अवज्ञा आंदोलन का विभिन्न क्षेत्रों में किस प्रकार प्रसार हुआ?

उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रसार देश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में हुआ। तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने त्रिचिनोपोली से वेदारण्यम तक नमक यात्रा की। मालाबार में के. केलप्पण ने नमक कानून का विरोध किया। मध्य प्रांत, महाराष्ट्र और कर्नाटक में जंगल कानूनों का उल्लंघन किया गया। जबकि बिहार और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में चौकीदारी टैक्स का बहिष्कार हुआ। पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त में अब्दुल गफ्फार खां जिन्हें ‘सीमान्त गांधी’ या ‘फ्रंटियर गांधी’ कहा जाता है के नेतृत्व में ‘लाल कुर्ती आन्दोलन’ (‘खुदाई खिदमतगार’ संगठन) चला।

5. गांधी-इरविन समझौते का सविनय अवज्ञा आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: गांधी-इरविन समझौते के बाद सविनय अवज्ञा आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया। गाँधी जी गोलमेज सम्मेलन (द्वितीय गोलमेज सम्मेलन, सितंबर-दिसंबर 1931) में भाग लेने ‘एस.एस. राजपूताना’ जहाज से इंग्लैंड गये। वहां से गांधी जी के कुछ हाथ नहीं लगा क्योंकि वहां साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व पर गतिरोध पैदा हो गया था। तब पुनः वापस लौटकर जनवरी 1932 में द्वितीय चरण के रूप में आन्दोलन की शुरुआत करनी पड़ी।

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  6. एन.सी.ई.आर.टी. (2020), भारत में राष्ट्रवाद, कक्षा 10, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली।

Dr. Om Prakash Singh, Assistant Professor and Head of History Department at Constituent Government College Thakurdwara

Dr. Om Prakash Singh

Assistant Professor & Head, Department of History

Constituent Government College, Thakurdwara, Moradabad (U.P)

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