भारत छोड़ो आंदोलन 1942 भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का वह निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। जिसने ब्रिटिश शासन की नींव पूरी तरह से हिलाकर रख दिया। महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के नारे के आह्वान से शुरू हुआ यह जन-आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश में एक अभूतपूर्व आंदोलन बनकर फैला गया। प्रिय छात्रों यदि आप संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य प्रशासनिक सेवाओं या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हमें भारत छोड़ो आंदोलन 1942 के कारण, प्रमुख घटनाएँ, समानांतर सरकारें और इसके ऐतिहासिक परिणाम को विस्तार से पढ़ना एवं समझना होगा। आपके अध्ययन को आसन करने के उद्देश्य से इस लेख को लिखा गया हैं, जिसे पढ़कर आप प्रतियोगी परीक्षाओं में आने वाले सभी प्रश्नी का जबाब आसानी से दे सकते है।

भूमिका: अगस्त क्रांति 1942 की शुरुआत
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 1942 का ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (Quit India Movement) या ‘अगस्त क्रांति’ ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे बड़ा जन-आंदोलन सिद्ध हुआ। इसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव पूरी तरह हिला दी थी। यह आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू किया गया एक निर्णायक अहिंसक और स्वतःस्फूर्त संग्राम था, जिसे परीक्षाओं में अक्सर ‘अगस्त क्रांति’ के नाम से पूछा जाता है।
भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख कारण (Causes of Quit India Movement)
1942 में इस विशाल जनांदोलन के भड़कने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
- क्रिप्स मिशन की विफलता: 1942 के क्रिप्स मिशन की असफलता ने भारतीय नेताओं और जनता को बेहद निराश किया। क्रिप्स मिशन भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देने के बजाय केवल डोमिनियन स्टेटस दे रहा था, जिसे गांधी जी ने ‘Post-dated Cheque’ या उत्तर-दिनांकित चेक कहा था
- भारतीयों की उपेक्षा: ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीय जनता की राय लिए बिना भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में धकेलना और देश का भाग्य तय करने की कोशिश करना।
- संसाधनों का अत्यधिक दोहन: द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी सेना को रोकने के नाम पर अंग्रेजों द्वारा भारतीय संसाधनों का मनमाने ढंग से अधिग्रहण और उन्हें नुकसान पहुँचाना।
- ब्रिटिश नीति पर अविश्वास: मलाया और बर्मा में युद्ध की आशंका पैदा होते ही अंग्रेजों ने गोरी बस्तियों (यूरोपियनों) को सुरक्षित निकाल लिया, जबकि स्थानीय भारतीयों को उनके भाग्य पर छोड़ दिया।
इन सभी परिस्थितियों ने मिलकर ‘भारत छोड़ो आंदोलन‘ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तैयार की।
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‘करो या मरो’ का नारा और आंदोलन की रूपरेखा

गांधी जी ने कांग्रेस को भी चुनौती दे डाली कि “मैं देश की बालू से ही कांग्रेस से बड़ा आंदोलन खड़ा कर दूंगा।” 8 अगस्त 1942 को बम्बई की कांग्रेस की बैठक (ग्वालियर टैंक मैदान) में ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया जिसका आलेख स्वयं महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने तैयार किया था । गांधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया और कहा कि “सम्पूर्ण आजादी से कम में किसी भी चीज से सन्तुष्ट होने वाला नहीं हूँ।”
सभी वर्गों को अलग-अलग निर्देश दिया गया कि:
- सरकारी कर्मचारी नौकरी न छोड़ें किन्तु कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा की घोषणा कर दें।
- सैनिक अपने देशवासियों पर गोली चलाने से इन्कार कर दें।
- देशी रियासतों की जनता अपने को राष्ट्र का अंग घोषित कर दे।
- किसान मालगुजारी देने से इन्कार कर दें।
9 व 10 अगस्त की घटनाएँ और जन-आक्रोश
किन्तु 9 अगस्त को तड़के ही अंग्रेजों द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन जीरो आवर’ के तहत सभी कांग्रेस के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थानों पर भेज दिया गया(जैसे गांधी जी को आगा खां पैलेस, पुणे में रखा गया)। इसके बाद भी बम्बई में लाखों लोग ग्वालियर टैंक की ओर उमड़ पड़े जहाँ अरुणा आसफ अली ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। 10 अगस्त को दिल्ली, कानपुर, इलाहाबाद, Varanasi, पटना इत्यादि स्थानों पर हड़ताल रही तथा बड़े-बड़े जुलूस निकाले गये।
सार्वजनिक स्थानों पर झण्डा फहराया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की संख्या में लोग एकत्र होकर रेल की पटरियां उखाड़ दी गयीं। पुल उखाड़ दिये गये और टेलीफोन एवं तार की लाइनें काट दी गयीं।
जन-विद्रोह का प्रसार, भूमिगत नेतृत्व और समानांतर सरकारें
स्कूलों एवं कालेजों में हड़ताल हो गयी, विद्रोहियों के शोर थे ‘अंग्रेज भारत छोड़ो’, थाना जलाओ, स्टेशन फूंक दो, अंग्रेज भाग गया आदि। पूर्वी यू०पी० में आजमगढ़, बलिया और गोरखपुर, तथा बिहार में गया, भागलपुर, पूर्णिया, चम्पारण, मुजफ्फरपुर स्वतःस्फूर्त जन विद्रोह के मुख्य केन्द्र थे। बिहार में इसी दौरान प्रसिद्ध 11 अगस्त का ‘पटना सचिवालय गोलीकांड’ हुआ था
भूमिगत आंदोलन और गुप्त कांग्रेस रेडियो

भूमिगत संगठनात्मक ढांचा भी तैयार हुआ जिसकी बागडोर अच्युत पटवर्धन, अरुणा आसफ अली, राममनोहर लोहिया, सुचिता कृपलानी, बीजू पटनायक, आर० पी० गोयनका, जयप्रकाश नारायण आदि ने संभाली(जिन्होंने हजारीबाग जेल से भागकर भूमिगत होकर ‘आज़ाद दस्ता’ बनाया)। व्यावसायिक वर्ग व्यापारियों ने अपनी थैलियां खोल दीं। पायलट तथा रेल ड्राइवर बम आदि समान इधर-उधर पहुँचाते थे।
राष्ट्रीयता के प्रचार के लिये सबसे नाटकीय घटना कांग्रेस रेडियो का प्रसारण था जिसमें राम मनोहर लोहिया प्रतिदिन बोलते थे और इस गुप्त ‘कांग्रेस रेडियो’ के संचालन में उषा मेहता की मुख्य भूमिका थी
देश में समानांतर सरकारों की स्थापना
देश के कुछ हिस्सों में ‘स्वतंत्र’ सरकार का गठन हुआ—
- बलिया (यू०पी०): चित्तू पाण्डेय के नेतृत्व में (देश की पहली समानांतर सरकार।
- मिदनापुर (बंगाल): ‘राष्ट्रीय सरकार’ (तामलुक की जातीय सरकार।
- सतारा (महाराष्ट्र): ‘समान्तर सरकार’ (नाना पाटिल के नेतृत्व में, जो सबसे लंबे समय तक चली।
- तलचर (ओडिशा): ‘तलचर की सरकार’ आदि।
भारत छोड़ो आंदोलन का ऐतिहासिक महत्त्व और परिणाम
इस प्रकार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों में भारत छोड़ो आन्दोलन एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ। इसका महत्त्व इस बात में निहित है कि पहली बार इसने दिखा दिया कि राष्ट्रवादी भावनाएं किस गहराई तक अपनी जड़ जमा चुकी थीं और जनता संघर्ष और बलिदान की कितनी बड़ी क्षमता प्राप्त कर चुकी है तथा स्पष्ट कर दिया कि जनता की इच्छा के विरुद्ध शासन कर सकना अंग्रेजों के लिये सम्भव नहीं है और इन लोगों का यह उद्देश्य कि सत्ता हस्तान्तरण के प्रश्न पर ही कोई बात हो सकती है, क्रिप्स मिशन से लेकर माउण्ट बेटन योजना तक देखा जा सकता है।
Quick Revision: भारत छोड़ो आंदोलन 1942 एक नज़र में
| प्रमुख पहलू | मुख्य ऐतिहासिक तथ्य (Exam Special Data) |
| आंदोलन का नाम | भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) / अगस्त क्रांति |
| प्रस्ताव व शुरुआत की तिथि | 8 अगस्त 1942 (प्रस्ताव पारित) | 9 अगस्त 1942 (आंदोलन शुरू) |
| मुख्य स्थान (Venue) | गवालिया टैंक मैदान, बॉम्बे (अब ‘अगस्त क्रांति मैदान’) |
| ऐतिहासिक नारा | ‘करो या मरो‘ (Do or Die) – महात्मा गांधी द्वारा दिया गया |
| तत्कालीन कारण | क्रिप्स मिशन (1942) की विफलता और द्वितीया विश्व युद्ध के प्रभाव |
| ब्रिटिश सरकार का दमन चक्र | ऑपरेशन जीरो आवर (Operation Zero Hour) — 9 अगस्त की सुबह ही सभी बड़े नेता गिरफ्तार |
| नेताओं के जेल स्थान | • महात्मा गांधी & कस्तूरबा: आगा खाँ पैलेस (पुणे) • नेहरू, पटेल व अन्य: अहमदनगर किला |
| भूमिगत (Underground) नेतृत्व | जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, अरुणा आसफ अली |
| गुप्त कांग्रेस रेडियो | उषा मेहता (बॉम्बे से गुप्त रेडियो केंद्र का संचालन) |
| प्रमुख समानांतर सरकारें | • बलिया (UP): चित्तू पांडे (पहली समानांतर सरकार) • तामलुक (बंगाल): जातीय सरकार (मातंगिनी हाजरा का योगदान) • सतारा (महाराष्ट्र): प्रति सरकार (नाना पाटिल – सबसे लंबी चलने वाली) |
| आंदोलन का मुख्य प्रभाव | इसने अंग्रेजों को यह स्पष्ट कर दिया कि भारत पर अब उनका जबरन शासन कायम रखना असंभव है। |
निष्कर्ष
1942 के इस महान आंदोलन के बाद से ब्रिटिश हुकूमत का ध्यान सिर्फ इस बात पर केंद्रित हो गया कि सत्ता का हस्तांतरण (Transfer of Power) कैसे किया जाए। यही कारण है कि क्रिप्स मिशन से लेकर माउंटबेटन योजना तक की सभी राजनीतिक गतिविधियों का अंतिम लक्ष्य भारत की पूर्ण स्वतंत्रता ही रहा।
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विद्यार्थियों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर: भारत छोड़ो आंदोलन को ‘अगस्त क्रांति’ इसिलिएं कहा जाता हैं क्योंकिइस आंदोलन का ऐतिहासिक प्रस्ताव 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा पारित किया गया था। 9 अगस्त की सुबह से ही यह क्रांति एक जन-आंदोलन के रूप में शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गई । चूंकि यह क्रांति अगस्त महा में शुरू हुई थी।, अगस्त महा शुरू होने के कारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में इस क्रांतिको ‘अगस्त क्रांति’ के नाम से जाना जाता है।
उत्तर: 9 अगस्त 1942 की सुबह ब्रिटिश सरकार द्वारा ‘ऑपरेशन जीरो आवर’ चलाया गया एक गुप्त पुलिस अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य आंदोलन को शुरू होने से पहले ही इसका दमन करना था। इस ऑपरेशन के तहत महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और अबुल कलाम आजाद सहित कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार करके अलग-अलग जेलों में बंद कर दिया गया। हालांकि, ब्रिटिश सरकार के इस पुलिस अभियान से आंदोलन रुका नहीं, बल्कि आम जनता ने खुद आगे आकार इस आंदोलन का नेतृत्व संभाल लिया।
उत्तर: आंदोलन के शीर्ष नेताओं के जेल चले जाने के बाद युवा और भूमिगत (Underground) नेताओं ने इस आंदोलन की कमान संभाली। इनमें जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन और अरुणा आसफ अली प्रमुख थे। वहीं, उषा मेहता ने बॉम्बे से गुप्त ‘कांग्रेस रेडियो’ का संचालन शुरू करके समस्त देशवासियों तक आंदोलन के समाचार पहुँचाने का साहसिक कार्य किया।
उत्तर: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरानमुख्य रूप से तीन स्थानों पर समानांतर सरकारें बनाई गई। बलिया (उत्तर प्रदेश) मेंचित्तू पांडे के नेतृत्व में पहली समानांतर सरकार बनी। तामलुक (मिदनापुर, बंगाल) में’जातीय सरकार’ का गठन हुआ, जिसने सशस्त्र विद्युत वाहिनी बनाई और सतारा (महाराष्ट्र) में नाना पाटिल के नेतृत्व में ‘प्रति सरकार’ बनी, जो 1945 तक चलने वाली सबसे लंबी समानांतर सरकार थी।
उत्तर: प्रतियोगी परीक्षाओं (Mains और Prelims) की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह टॉपिक काफी अहम है। UPSC और State PCS जैसे एग्ज़ाम्स में अक्सर इस आंदोलन से जुड़े कई सवाल पूछे जाते हैं—जैसे क्रिप्स मिशन की नाकामयाबी, गांधीजी के ‘करो या मरो’ नारे का असली मक़सद, अलग-अलग इलाकों में बनी समानांतर सरकारों का योगदान, और इस आंदोलन का वह अंतिम प्रभाव जिसने अंग्रेज़ों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
प्रामाणिक ऐतिहासिक संदर्भ (Academic References)
- चंद्र, विपिन (2018), भारत का स्वतंत्रता संघर्ष, हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
- ग्रोवर, बी. एल. एवं अलका मेहता (2018), आधुनिक भारत का इतिहास: एक नवीन मूल्यांकन, एस. चंद एंड कंपनी लिमिटेड, नई दिल्ली।
- महाजन, वी. डी. (2010), आधुनिक भारत का इतिहास, एस. चंद एंड कंपनी लिमिटेड, नई दिल्ली।
- शुक्ल, आर. एल. (संपादक) (2012), आधुनिक भारत का इतिहास, हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
- सरकार, सुमित (2009), आधुनिक भारत (1885-1947), राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली।
- एन.सी.ई.आर.टी. (2020), भारतीय इतिहास के कुछ विषय (भाग-3), कक्षा 12, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली।
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Dr. Om Prakash Singh
Assistant Professor & Head, Department of History
Constituent Government College, Thakurdwara, Moradabad (U.P)
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