रॉलेट एक्ट (1919) जैसे काले कानून और जलियाँवाला बाग हत्याकांड की दर्दनाक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का रुख बदल दिया। B.A., M.A., UPSC और SSC की परीक्षाओं के लिए इस संपूर्ण इतिहास, कारण, परिणाम और रिवीजन नोट्स को यहाँ सरल भाषा में पढ़ें।

प्रस्तावना (Introduction)
भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के इतिहास में 1919 का साल ब्रिटिश सरकार की भारतीयों के प्रति कड़ी और दमनकारी नीति का समय माना जाता है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद भारतीय जनता को उम्मीद थी कि ब्रिटिश उन्हें स्वायत्तता और नागरिक अधिकार देंगे, लेकिन ब्रिटिश शासन द्वारा दमनकारी रॉलेट एक्ट (मार्च 1919) लागू कर दिया। इस ‘काले कानून‘ का विरोध सम्पूर्ण भारतीयों ने किया।
इस कानून के विरोध में उठे जनाक्रोश के बीच 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जलियाँवाला बाग में ब्रिटिश शासन द्वारा एक घटना को अंजाम दिया गया, जिसे जलियाँवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता है। बर्बरतापूर्ण घटित जलियाँवाला बाग हत्याकांड की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
इन ऐतिहासिक घटनाओं और ब्रिटिश सरकार की क्रूर नीति ने महात्मा गांधी को अंग्रेजों के ‘सहयोगी’ (Cooperator) से ‘असहयोगी’ (Non-Cooperator) बनने पर मजबूर कर दिया। रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड आदि की पृष्ठभूमि में आगे चलकर 1920 के ऐतिहासिक असहयोग आंदोलन की रूप रेखा को तैयार कर दी।
गाँधी युग की सीरिज का यह भाग-3 भी B.A., M.A., UPSC, State PCS, B.Ed. एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें हमने 1919 की इन प्रमुख घटनाओं, जाँच आयोगों (हंटर कमेटी व मालवीय समिति), मुख्य नेतृत्वकर्ताओं और इनसे जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को समाहित करने का प्रयास किया है, जिसमें विस्तृत नोट्स एवं सर्वाधिक पूछे जाने वाले प्रश्न-उत्तर को भी शामिल करने की कोशिश की गयी हैं।
यदि आप अपनी परीक्षा के लिए कम समय में रिवीजन करना चाहते हैं या उत्तर-लेखन (Answer Writing) को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण और प्रामाणिक अध्ययन सामग्री साबित होगा।
नोट: अगर आपने अभी तक गांधी जी के 1915 से 1918 तक के शुरुआती आंदोलनों की सीरिज नहीं पढ़ी है, तो इस लेख को पढ़ने से पहले हमारी इस सीरिज को अवश्य पढ़ें–
गांधी युग नोट्स पार्ट-1: जीवन परिचय, दक्षिण अफ्रीका प्रवास एवं भारत आगमन (1869-1915)
इस भाग (Part-3) में हम क्या-क्या कवर करेंगे?
- रॉलेट एक्ट (मार्च 1919): ‘काले कानून’ की पृष्ठभूमि, प्रावधान, सत्याग्रह सभा और देशव्यापी विरोध।
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): घटना का मुख्य कारण, जनरल डायर की क्रूरता, राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ और उपाधियों का त्याग।
- जाँच समितियाँ: ब्रिटिश सरकार की हंटर कमेटी और कांग्रेस की मदन मोहन मालवीय समिति की तुलनात्मक रिपोर्ट।
- प्रामाणिक संदर्भ पुस्तकें (References): B.A. व M.A. उत्तर-लेखन हेतु मानक पुस्तकें।
- महत्वपूर्ण मॉडल प्रश्न एवं उत्तर (PYQs): परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर।
1. रॉलेट एक्ट (मार्च 1919) – ‘काला कानून’

भारतीय जन मानस को यह आशा थी कि प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटिश सरकार उन्हें संवैधानिक सुधारों और स्वायत्तता दे देगी, परंतु ब्रिटिश सरकार ने अपना वाही पुराना क्रूरता एवं दमनकारी रुख अपनाते हुए ‘रॉलेट एक्ट’ लागू कर दिया। यह कानून भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने का एक कुत्सित प्रयास था।
(i) पृष्ठभूमि एवं गठन
- राजद्रोह समिति (Sedition Committee): प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत में बढ़ रही क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने(कुचलने) के लिए ब्रिटिश सरकार ने सर सिडनी रॉलेट (Sir Sidney Rowlatt) की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की।
- अधिनियम का पारित होना: इस समिति की सिफारिशों के आधार पर मार्च 1919 में केंद्रीय विधान परिषद में ‘अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम, 1919′ (Anarchical and Revolutionary Crimes Act, 1919) पारित किया गया, जिसे आम भाषा में ‘रॉलेट एक्ट‘ कहा गया। केंद्रीय विधान परिषद के भारतीय सदस्यों जैसे पंडित मदन मोहन मालवीय, मोहम्मद अली जिन्ना और मजहर-उल-हक ने इस विधेयक के विरोध में इस्तीफा दे दिया था।
(ii) मुख्य प्रावधान और स्वरूप
- असीमित अधिकार: इस कानून के तहत ब्रिटिश मजिस्ट्रेट या पुलिस को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना कोई कारण बताए, बिना वारंट गिरफ्तार करने और उन पर बिना मुकदमा चलाए 2 साल तक जेल में बंद रखने का अधिकार दे दिया गया।
- विशेष अदालतें: बंदियों के मुकदमों की सुनवाई के लिए एक अलग विशेष अदालत का प्रावधान रखा गया था, जिसके फैसले के खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती थी।
- जनता का आक्रोश (नारा): इस काले कानून के दमनकारी स्वरूप के कारण भारतीयों ने इसे “बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का कानून” और ‘काला कानून‘ (Black Act) कहा।
(iii) विरोध एवं सत्याग्रह सभा का गठन
- सत्याग्रह सभा (Satyagraha Sabha): रॉलेट एक्ट के खिलाफ संगठित विरोध दर्ज कराने के लिए महात्मा गांधी ने 24 फरवरी 1919 (कार्यान्वयन 17 मार्च 1919) को बम्बई में ‘सत्याग्रह सभा‘ की स्थापना की।
- प्रमुख सदस्य: शंकरलाल बैंकर, उमर शोभानी, द्वारकादास जमनादास, और बी. जी. हॉर्निमन (बॉम्बे क्रॉनिकल के संपादक)।
- देशव्यापी हड़ताल (6 अप्रैल 1919): 6 अप्रैल 1919 को गांधी जी ने पूरे देश में एक शांतिपूर्ण ‘राष्ट्रीय अपमान एवं प्रार्थना दिवस’ (National Day of Humiliation and Prayer) का आयोजन करने के लिए हड़ताल का आह्वान किया।
- दिल्ली में विरोध नेतृत्व: दिल्ली में आंदोलन का नेतृत्व प्रसिद्ध आर्य समाज नेता स्वामी श्रद्धानंद ने किया। उन्होंने टैक्स न देने का आंदोलन चलाने को कहा।
- गांधी जी की गिरफ्तारी: जब गांधी जी पंजाब जाने की तैयारी कर रहे थे, तब ब्रिटिश सरकार ने स्थिति समझ ली। उन्होंने 8 अप्रैल 1919 को पलवल (हरियाणा) रेलवे स्टेशन पर गांधी जी को गिरफ्तार करके बम्बई वापस भेज दिया। यह घटना हमें याद दिलाती है कि इतिहास में छोटे-छोटे कदम भी बड़े-बड़े बदलाब लाते हैं।
2. जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)

13 अप्रैल 1919 को हुआ जलियाँवाला बाग हत्याकांड आधुनिक भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय है। इस घटना ने स्वतंत्रता संग्राम की रह को ही बदल दिया और महात्मा गांधी को ब्रिटिश सरकार का सख्त विरोधी बना दिया।
(i) पृष्ठभूमि एवं घटना का कारण
- लोकप्रिय नेताओं की गिरफ्तारी: रॉलेट एक्ट के खिलाफ पंजाब में बड़ा विरोध चल रहा था। 9 अप्रैल 1919 को पंजाब के दो बहुत लोकप्रिय राष्ट्रवादी नेताओं—डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू को ब्रिटिश प्रशासन ने गिरफ्तार कर अज्ञात जगह पर भेज दिया।
- वैशाखी का दिन: 13 अप्रैल 1919 को, अमृतसर के ‘जलियाँवाला बाग’ में शाम को एक सार्वजनिक जनसभा आयोजित की गई। यह सभा नेताओं की रिहाई और रॉलेट एक्ट के शांतिपूर्ण विरोध के लिए थी, और इसे वैशाखी का पावन पर्व माना गया।
(ii) बर्बर हत्याकांड और आंकड़े
- जनरल डायर की क्रूरता: पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ‘डायर (Michael O’Dwyer) के आदेश पर, अमृतसर में कार्यवाहक सैन्य ब्रिगेडियर जनरल आर. ई. एच. डायर (General R.E.H. Dyer) ने बाग के एक ही संकरे मुख्य द्वार को घेर लिया और बिना चेतावनी के निहत्थी, निर्दोष भीड़ पर गोलियाँ चलने का आदेश दे दिया।
- हताहतों की संख्या:
- सरकारी रिपोर्ट (हंटर कमेटी): इस की रिपोर्ट के अनुसार इस हत्याकांड में 379 लोग मारे गए और 1200 घायल हुए।
- वास्तविक/कांग्रेस की रिपोर्ट: इस रोपोर्ट के अनुसार जलियाँवाला नरसंहार में 1000 से अधिक निर्दोष नागरिक शहीद हुए थे।
- गद्दारी/मुखबिरी: जलियाँवाला की गुप्त जनसभा की सूचना और बाग का खाका डायर को स्थानीय भारतीय डॉ. हंसराज ने दिया और इसने अंग्रेजों के लिए मुखबिर का काम किया था।
(iii) हत्याकांड के विरोध में राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
- रवींद्रनाथ टैगोर: इन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा दी गई अपनी ‘नाइटहुड‘ (Sir) की उपाधि त्याग दी।
- सर शंकरन नायर: इन्होंने वायसराय की कार्यकारिणी परिषद (Viceroy’s Executive Council) के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया।
- महात्मा गांधी: इन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान मिली ‘केसर-ए-हिंद‘ की उपाधि वापस कर दी और अंग्रेजों को ‘शैतानी शासन’ कहा।
- जमनालाल बजाज: इन्होंने अपनी ‘राय बहादुर’ की उपाधि लौटा दी थी।
3. जाँच समितियाँ (Inquiry Committees)
(i) हंटर कमेटी / हंटर कमीशन (1919) – ब्रिटिश सरकार द्वारा
- आधिकारिक नाम: डिसऑर्डर्स इंक्वायरी कमेटी (Disorders Inquiry Committee)।
- अध्यक्ष: लॉर्ड विलियम हंटर (W.W. Hunter)।
- भारतीय सदस्य (तीन): चिमनलाल हरिलाल सीतलवाड़, पंडित जगत नारायण, और साहबजादा सुल्तान अहमद खान।
- परिणाम व लीपापोती: कमेटी ने डायर के कृत्य को केवल “कर्तव्य की गलत धारणा” माना और कमेटी ने डायर को नौकरी से बर्खास्त कर वापस इंग्लैंड भेज दिया।
- इंग्लैंड में सम्मान: ब्रिटिश ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ ने डायर को “ब्रिटिश साम्राज्य का शेर” (Lion of the British Empire) कहा और ‘मॉर्निंग पोस्ट’ अखबार ने उसके लिए धन जुटाकर “तलवार ऑफ ऑनर” को भेंट किया।
(ii) मदन मोहन मालवीय समिति (1919) – कांग्रेस द्वारा गठित
- अध्यक्ष: पंडित मदन मोहन मालवीय।
- अन्य प्रमुख सदस्य: महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, देशबंधु चित्तरंजन दास (C.R. Das), अब्बास तय्यबजी (तैयबजी) और एम.आर. जयकर इस समिति के सदस्य थे।
- रिपोर्ट व माँग: इस समिति ने अपनी निष्पक्ष जाँच के बाद ब्रिटिश सरकार के इस बर्बर कृत्य की कड़ी निंदा की। समिति ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजा की मांग की। और जनरल डायर को तुरंत फाँसी दिए जाने की सिफारिश की।

4. विशेष ऐतिहासिक तथ्य (Exam Special Points)
- ‘केसर-ए-हिंद‘ की वापसी: गांधी जी ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों से मिली ‘केसर-ए-हिंद’ की उपाधि, जलियाँवाला बाग हत्याकांड और रॉलेट एक्ट के विरोध में ब्रिटिश सरकार को वापस कर दी।
- हंटर समिति में भारतीय सदस्य: ब्रिटिश सरकार ने डिसऑर्डर्स इंक्वायरी समिति (हंटर समिति)
बनाई। इस समिति में तीन भारतीय सदस्य शामिल थे—सर चिमनलाल हरिलाल सीतलवाड़, पंडित जगत नारायण और साहबजादा सुल्तान अहमद खान। - माइकल ओ‘डायर का वध: जलियाँवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए पंजाब के महान क्रांतिकारी सरदार उधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन के ‘कैक्सटन हॉल’ में तत्कालीन पंजाब के गवर्नर माइकल ओ’डायर को गोली मारी थी।
परीक्षा से पहले एक नजर में: गांधी युग Part-3
| घटना / आंदोलन | वर्ष | स्थान | मुख्य कारण, नेतृत्व एवं परिणाम |
| रॉलेट एक्ट | मार्च 1919 | संपूर्ण भारत | कारण: क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने के लिए सर सिडनी रॉलेट समिति की सिफारिश पर कानून बनाया गया। स्वरूप: “बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का कानून”। परिणाम: गांधी जी द्वारा सत्याग्रह सभा का गठन; 6 अप्रैल को देशव्यापी हड़ताल; 8 अप्रैल को गांधी जी पलवल में गिरफ्तार। |
| जलियाँवाला बाग हत्याकांड | 13 अप्रैल 1919 | अमृतसर (पंजाब) | कारण: पंजाब के लोकप्रिय नेताओं—डॉ. सत्यपाल व डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी का विरोध। घटना: वैशाखी के दिन जनरल डायर द्वारा शांतिपूर्ण सभा पर अंधाधुंध गोलीबारी। परिणाम: रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘नाइटहुड’ व गांधी जी ने ‘केसर-ए-हिंद’ त्यागी; हंटर कमेटी और मालवीय समिति का गठन। |
निष्कर्ष (Conclusion)
वर्ष 1919 की घटनाएँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सिर्फ एक दुखद घटना नहीं थीं, बल्कि यह एक ऐसा मोड़ था, जिसने पूरे आंदोलन को बदल दिया। रॉलेट एक्ट जैसे ‘काले कानून’ ने जहाँ ब्रिटिश शासन के दमनकारी चेहरे को दिखाया, वहीं जलियाँवाला बाग के बर्बर नरसंहार ने देश भर में सोए हुए जनआक्रोश को ज्वाला (गुस्से) में बदल दिया।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा ऐतिहासिक प्रभाव यह रहा कि जिसने अब तक ब्रिटिश न्यायप्रणाली में विश्वास रखने वाले महात्मा गांधी को अंग्रेजों के ‘सहयोगी’ से ‘असहयोगी’ बनने पर विवश कर दिया। इस हत्याकांड और सरकारी जाँच समितियों की लीपापोती ने भारतीय जनता की ब्रिटिश शासन के प्रति जो निष्ठा थी वह पूरी तरह से टूट(समाप्त) चुकी थी। इसलिए, स्थानीय स्तर पर शुरू हुए सत्याग्रह अब पूरे देश में एक जन आंदोलन बन गया। इस जन आंदोलन ने बाद में 1920 के ऐतिहासिक असहयोग आंदोलन की ठोस नींव रखी।
आधुनिक भारतीय इतिहास में 1919 का का समय BA, MA एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। इस समय की घटनाओं, उनके कारणों और दूरगामी परिणामों का गहराई से पढ़ना न सिर्फ मुख्य परीक्षा (Mains) में सही और असरदार उत्तर-लेखन में मदद करता है, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विकास की कहानी को समझने का नजरिया भी साफ़ करता है।
यह भी पढ़ें: भारत छोड़ो आंदोलन 1942: कारण, घटनाएँ और परिणाम | Quit India Movement
विद्यार्थियों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर: रॉलेट एक्ट को भारतीयों ने ‘काला कानून’ कहा क्योंकि इस कानून तहत ब्रिटिश सरकार को किसी भी व्यक्ति को बिना कारण बताए, बिना वारंट के गिरफ्तार करने और बिना मुकदमा चलाए दो साल तक जेल में बंद रखने का अधिकार था। इसे “बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील” का कानून कहा गया ।
उत्तर: 13 अप्रैल 1919 (वैशाखी के दिन) अमृतसर के जलियाँवाला बाग में लोग रॉलेट एक्ट का शांतिपूर्ण विरोध करने और पंजाब के दो लोकप्रिय नेताओं—डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की अवैध गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए एकत्र हुए थे।
उत्तर: रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई ‘नाइटहुड’ (Sir) की उपाधि त्यागी और महात्मा गांधी ने प्रथम विश्वयुद्ध के बाद मिली ‘केसर-ए-हिंद’ की उपाधि वापस कर दी।
उत्तर: ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड हंटर की अध्यक्षता में ‘हंटर समिति ‘ (Disorders Inquiry Committee) बनाई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पंडित मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में ‘मालवीय समिति’ स्थापित की थी।
उत्तर: पंजाब के महान क्रांतिकारी सरदार उधम सिंह ने जलियाँवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में पंजाब के गवर्नर माइकल ओ’डायर को गोली मारकर मार डाला।
परीक्षा हेतु संभावित एवं विगत वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs):
1. गांधीजी ने साबरमती आश्रम कब छोड़ा और क्या प्रतिज्ञा की थी?
उत्तर: 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम छोड़ा और प्रतिज्ञा की कि स्वराज प्राप्त किए बिना वे आश्रम वापस नहीं लौटेंगे।
2. भारत लौटने के बाद गांधीजी ने अपना पहला सार्वजनिक भाषण कहाँ दिया था?
उत्तर: फरवरी 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के उद्घाटन समारोह में गांधीजी ने अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया था।
3. लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन (1916) के प्रमुख परिणाम क्या थे?
उत्तर: इस अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की थी। इसमें कांग्रेस के नरमपंथी और गरमपंथी नेताओं में पुनः एकता हुई तथा कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता हुआ।
4. लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन (1916) में राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को किस आंदोलन के लिए आमंत्रित किया था?
उत्तर: राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को चंपारण के नील किसानों की समस्या के समाधान के लिए आमंत्रित किया था।
5. लखनऊ समझौते (1916) में कांग्रेस की किस नीति को विवादास्पद माना जाता है?
उत्तर: मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था को स्वीकार करना कांग्रेस की एक विवादास्पद नीति मानी जाती है।
6. भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह किसे माना जाता है? यह किस व्यवस्था के विरुद्ध था?
उत्तर: चंपारण सत्याग्रह (1917) को भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह माना जाता है। यह नील की खेती की ‘तिनकठिया प्रथा’ के विरुद्ध था।
7. चंपारण सत्याग्रह के बाद किसानों की समस्याओं की जाँच के लिए किस समिति का गठन किया गया था?
उत्तर: चंपारण एग्रेरियन कमेटी (Champaran Agrarian Committee) का गठन किया गया था।
8. गांधीजी को ‘महात्मा’ कहकर संबोधित करने वाले प्रमुख व्यक्ति कौन थे?
उत्तर: रवीन्द्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को ‘महात्मा’ कहकर संबोधित किया था।
9. महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह का विरोध किस नेता ने किया था?
उत्तर: एन. जी. रंगा ने चंपारण सत्याग्रह का विरोध किया था।
10. चंपारण के नील किसानों से वसूली गई अवैध राशि में से कितनी राशि वापस करने का निर्णय हुआ था?
उत्तर: किसानों से वसूली गई अवैध राशि का 25 प्रतिशत वापस करने का निर्णय हुआ था।
11. चंपारण सत्याग्रह में गांधीजी के प्रमुख सहयोगी कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जे. बी. कृपलानी, अनुग्रह नारायण सिंह, ब्रजकिशोर प्रसाद, मजहरुल हक, महादेव देसाई और नरहरि पारिख आदि गांधीजी के प्रमुख सहयोगी थे।
12. गांधीजी ने भारत में पहली बार उपवास किस आंदोलन के दौरान किया था?
उत्तर: मार्च 1918 में अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन के दौरान गांधीजी ने पहली बार उपवास किया था।
13. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में मजदूर कितने प्रतिशत बोनस की माँग कर रहे थे?
उत्तर: मजदूर 35 प्रतिशत बोनस की माँग कर रहे थे।
14. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में गांधीजी का साथ देने वाली महिला नेता कौन थीं?
उत्तर: अनसूया बेन सराभाई ने गांधीजी का साथ दिया था। वे अंबालाल सराभाई की बहन थीं।
15. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: मिल मालिकों द्वारा प्लेग बोनस बंद किए जाने के बाद मजदूरों ने मजदूरी बढ़ाने की माँग की, जिसके कारण आंदोलन शुरू हुआ।
16. अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन की स्थापना कब और किसने की थी?
उत्तर: 1920 में गांधीजी और अनसूया बेन सराभाई ने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन (मजदूर महाजन संघ) की स्थापना की थी।
17. भारत में गांधीजी के प्रारंभिक किसान सत्याग्रहों में से एक किसे माना जाता है?
उत्तर: खेड़ा सत्याग्रह (1918) को गांधीजी के प्रारंभिक किसान सत्याग्रहों में से एक माना जाता है।
18. खेड़ा सत्याग्रह से किस नेता का राजनीतिक जीवन प्रारंभ हुआ था?
उत्तर: खेड़ा सत्याग्रह से सरदार वल्लभभाई पटेल के राजनीतिक जीवन को प्रमुख रूप से दिशा मिली।
19. सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना किसने और कब की थी?
उत्तर: गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की थी।
20. ‘प्याज चोर’ के नाम से किसे जाना जाता था?
उत्तर: मोहनलाल पांड्या को ‘प्याज चोर’ के नाम से जाना जाता था।
21. खेड़ा सत्याग्रह में किसानों को भू-राजस्व में छूट देने का आधार क्या था?
उत्तर: यदि कुल उपज सामान्य उपज की एक-चौथाई या उससे कम हो जाती थी, तो भू-राजस्व में पूरी छूट देने का प्रावधान था।
22. हरिजन सेवक संघ की स्थापना किसने और कब की थी?
उत्तर: महात्मा गांधी ने 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना की थी। इसका प्रारंभिक नाम ‘ऑल इंडिया एंटी-अनटचेबिलिटी लीग’ था।
23. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गांधीजी को किस नाम से संबोधित किया गया था?
उत्तर: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों की भर्ती में सहयोग करने के कारण गांधीजी को ‘रिक्रूटिंग सार्जेंट’ कहा गया था।
24. गांधीजी को ‘कैसर-ए-हिंद’ पदक कब प्रदान किया गया था और उन्होंने इसे कब लौटाया?
उत्तर: गांधीजी को 1915 में ‘कैसर-ए-हिंद’ पदक प्रदान किया गया था। उन्होंने 1920 में असहयोग आंदोलन के दौरान इसे वापस कर दिया। गांधीजी के अपने पत्र में इस पदक को दक्षिण अफ्रीका में किए गए मानवीय कार्यों के लिए दिए जाने का उल्लेख मिलता है।
25. गांधीजी के सामाजिक कार्यक्रम के तीन प्रमुख उद्देश्य क्या थे?
उत्तर: हिंदू-मुस्लिम एकता, अस्पृश्यता का उन्मूलन और महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार उनके प्रमुख सामाजिक उद्देश्यों में शामिल थे।
26. किन घटनाओं के बाद गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार के प्रति सहयोग की नीति से असहयोग की ओर रुख किया?
उत्तर: रॉलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के बाद गांधीजी का ब्रिटिश सरकार के प्रति मोहभंग हुआ और उन्होंने असहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया। 1920 में असहयोग आंदोलन को कांग्रेस ने स्वीकार किया।
27. रॉलेट एक्ट का आधिकारिक नाम क्या था?
उत्तर: रॉलेट एक्ट का आधिकारिक नाम ‘Anarchical and Revolutionary Crimes Act, 1919’ था।
28. ‘बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील’ किस अधिनियम के लिए कहा गया था?
उत्तर: ‘बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील’ रॉलेट एक्ट (1919) के लिए कहा गया था।
29. गांधीजी ने रॉलेट एक्ट के विरोध में किस संस्था की स्थापना की थी?
उत्तर: गांधीजी ने रॉलेट एक्ट के विरोध में बंबई में ‘सत्याग्रह सभा’ की स्थापना की थी।
30. गांधीजी को रॉलेट सत्याग्रह के दौरान कहाँ और कब रोका गया था?
उत्तर: गांधीजी को 9 अप्रैल 1919 को पलवल स्टेशन (वर्तमान हरियाणा) पर रोका गया और उन्हें पंजाब जाने से रोक दिया गया।
31. दिल्ली में रॉलेट एक्ट के विरोध का नेतृत्व किसने किया था?
उत्तर: स्वामी श्रद्धानंद ने दिल्ली में रॉलेट एक्ट के विरोध का नेतृत्व किया था।
32. जलियाँवाला बाग में लोग किसके विरोध में एकत्र हुए थे?
उत्तर: डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में लोग जलियाँवाला बाग में एकत्र हुए थे।
33. जलियाँवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब का लेफ्टिनेंट गवर्नर कौन था और गोली चलाने का आदेश किसने दिया था?
उत्तर: पंजाब का लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’ड्वायर था। जलियाँवाला बाग में गोली चलाने का आदेश ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर (R. E. H. Dyer) ने दिया था।
34. जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में किन प्रमुख व्यक्तियों ने ब्रिटिश सरकार के सम्मान/पद से त्याग किया?
उत्तर: रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि लौटा दी और सर शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारिणी परिषद से इस्तीफा दे दिया।
35. हंटर समिति में भारतीय सदस्यों के नाम क्या थे?
उत्तर: हंटर समिति में भारतीय सदस्यों के रूप में चिमनलाल हरिलाल सेतलवाड़, पंडित जगत नारायण और साहिबजादा सुल्तान अहमद शामिल थे।
36. जलियाँवाला बाग हत्याकांड की जाँच के लिए कांग्रेस द्वारा गठित जाँच समिति के प्रमुख कौन थे?
उत्तर: कांग्रेस की जाँच समिति में पंडित मदन मोहन मालवीय प्रमुख नेताओं में थे। इस समिति में मोतीलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सी. आर. दास, अब्बास तैयबजी और एम. आर. जयकर आदि भी शामिल थे।
37. ऊधम सिंह ने माइकल ओ’ड्वायर की हत्या कब और कहाँ की थी?
उत्तर: ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में माइकल ओ’ड्वायर की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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Dr. Om Prakash Singh
Assistant Professor & Head, Department of History
Constituent Government College, Thakurdwara, Moradabad (U.P)
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